11वां विश्व हिंदी सम्मेलन मॉरीशस 2018: हिंदी को भविष्य की भाषा बनाने का संकल्प


विश्व हिंदी सम्मेलन 2018 का आयोजन 18 से 20 अगस्त 2018 को हिंदी को भविष्य और विश्व की भाषा बनाने के संकल्प के साथ 11वां विश्व हिंदी सम्मेलन सोमवार को मॉरीशस में संपन्न हो गया। केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय बैठक पर कार्य शुरू किया था सम्मेलन का मुख्य विषय ‘हिंदी विश्व और भारतीय संस्कृति था । विश्व हिंदी सचिवालय (WHS) कार्यक्रम का आयोजन प्राधिकरण किया गया था । सम्मेलन में हिंदी के शास्त्रीय और आधुनिक तत्व दोनों शामिल किया गया था और दुनिया भर से हिंदी के प्रतिनिधियों और विद्वानों की भागीदारी की गई थी । 1973 में महाराष्ट्र के वर्धा में विश्व हिंदी सम्मेलन की संकल्पना की गई थी और पहला सम्मेलन नागपुर में 1975 में आयोजित किया गया था।

इस मौके पर जो अनुशंसाएं की गईं उसमें मुख्य जोर हिंदी को सूचना-प्रौद्योगिकी और कंप्यूटर की भाषा के रूप में विकसित करने पर दिया गया।
यहां गोस्वामी तुलसीदास नगर के विशाल सभागार में आयोजित समापन समारोह में गीतकार प्रसून जोशी और मॉरीशस के दिवंगत साहित्कार अभिमन्यु अनत समेत देश-विदेश के विद्वानों को विशिष्ट हिंदी सेवी सम्मान से नवाजा गया।

सी-डैक समेत कई संस्थाओं को भी हिंदी के साफ्टवेयर और टूल विकसित करने के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मॉरीशस के कार्यवाहक राष्ट्रपति परम शिव पिल्लै वयापुरी ने कहा कि समय आ गया है कि हिंदी को दुनिया में बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए। इसके लिए सभी को प्रयास करना होगा।

उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत भी हिंदी से की। तीन दिन के सम्मेलन में चर्चा के जो आठ सत्र हुए, उनकी अनुशंसाएं भी रखी गईं। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र से प्रसारित होने वाले साप्ताहिक हिंदी बुलेटिन को भी दुनिया भर से आए हिंदी प्रेमियों को सुनाया गया।

समारोह के विशिष्ट अतिथि मॉरीशस के मार्गदर्शक और रक्षा मंत्री अनिरुद्ध जगन्नाथ ने कहा :

  • मॉरीशस की आजादी हिंदी भाषा की बदौलत हुई
  • इस विश्व हिंदी सम्मेलन से भारत और उनके देश में खून का रिश्ता और गहरा हुआ है। 
  • मॉरीशस की आजादी हिंदी भाषा की बदौलत है। इसलिए वह चाहते हैं कि उनके देश की नई पीढ़ी हिंदी सीखे।



हिंदी हुकूमत की ताकत से नहीं, मानव शक्ति से बढ़ रही

विभिन्न देशों से आए हिंदी सेवियों का आभार जताते हुए विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने कहा कि इतिहास गवाह है कि भाषाएं हुकूमतों की ताकत से आगे बढ़ीं। लेकिन,भारत में संस्कृत भाषा संस्कृति के साथ विकसित हुई। अब हिंदी भाषा मानव शक्ति से आगे बढ़ रही है। इसलिए इसे विश्व भाषा बनने में कोई संदेह नहीं है।

हिंदी को सर्वग्राही बनाने के लिए डिजिटल इंकलाब की जरूरत

वरिष्ठ कवि डॉ.अशोक चक्त्रस्धर ने अपने सत्र की अनुशंसा में हिंदी में डिजिटल इंकलाब की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि हिंदी को संचार और सूचना-प्रौद्योगिकी की भाषा बनाने के लिए कोशिशें तेज करनी होंगी। हिंदी और भारतीय भाषाओं के लिए विशिष्ट प्रोग्रामिंग करनी चाहिए। इसके साथ ही मॉरीशस जैसे देशों से हिंदी में डिजिटल साझीदारी बढ़ाई जाए। उन्होंने खासतौर पर 'ई-महाशब्दकोश' और 'इमली' साफ्टवेयर की चर्चा की जो भारत में विकसित हुए हैं।

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