Sunday, 9 September 2018

पेट्रोल और डीजल की कीमत भारत में कैसे तय होती है?



पेट्रोल और डीजल की कीमत भारत में कैसे तय होती है?

भारत में लगभग 80 प्रतिशत तेल का आयात किया जाता है। यह तेल अपने प्राकृतिक रूप में होता है जिसे कच्चा तेल बोला जाता है।

सामान्यतया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह कच्चा तेल प्रति बैरल के हिसाब से खरीदा और बेचा जाता है. एक बैरल में तकरीबन 160 लीटर कच्चा तेल होता है और इसका भुगतान अधिकतर अमेरिकी डॉलर्स में करने की बाध्यता चली रही है।


जैसा कि हम सबको पता है कि खाड़ी के देशों में कच्चे तेल का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है| यहाँ पर कच्चे तेल के कुए बहुत बड़ी मात्रा में हैं और इन्ही कुओं से कच्चा तेल निकाला जाता है जो कि देश की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अन्य देशों को भी निर्यात कर दिया जाता है

अब सामान्य लोगों को समझाने के लिए हम यह मान लेते हैं कि भारत की हिन्दुस्तान पेट्रोलियम (HP) नाम की कंपनी सऊदी अरब से कच्चे तेल का आयात करती है।  हिन्दुस्तान पेट्रोलियम, सऊदी अरब की किसी कम्पनी से तेल का आयात करती है और समझौते की शर्त के अनुसार सऊदी कंपनी उस कच्चे तेल को नजदीकी भारतीय बंदरगाह पर पहुंचा देती है | इसे FOB (Free on Board) कहते है।

 जिसे बाद में विभिन्न उत्पादों के लिए अपने हिसाब से परिष्कृत किया जाता है. सऊदी अरब, भारत के लिए सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है।
इस प्रकार के लेन-देन में कच्चा तेल खरीदने वाला, बेचने वाले से निश्चित तेल की मात्रा पूर्व निर्धारित दरों पर किसी विशेष स्थान पर लेने पर राजी होता है. यह सौदे केवल नियंत्रित संस्थाओं द्वारा ही किए जाते हैं. भुगतान रोजाना और ताजा कीमतों के आधार पर तय किया जाता है. न्यूनतम खरीदारी 1,000 बैरल की होती है।

जिस कीमत पर हम पेट्रोल खरीदते हैं उसका करीब 48 फीसदी उसका बेस यानि आधार मूल्य होता है।

इसके अलावा करीब 35 फीसदी एक्साइज ड्यूटी, करीब 15 फीसदी सेल्स टैक्स और दो फीसदी कस्टम ड्यूटी लगाई जाती है।

तेल के बेस प्राइस में कच्चे तेल की कीमत, प्रॉसेसिंग चार्ज और कच्चे तेल को शोधित करने वाली रिफाइनरियों का चार्ज शामिल होता है।

एक्साइज ड्यूटी कच्चे तेल को अलग-अलग पदार्थों जैसे पेट्रोल, डीज़ल और किरोसिन आदि में तय करने के लिए लिया जाता है।

वहीं, सेल्स टैक्स यानी बिक्री कर संबंधित राज्य सरकार द्वारा लिया जाता है।

तेल पर कर:

  • राज्यों द्वारा लिया जाने वाला बिक्री कर ही विभिन्न राज्यों में पेट्रोल की कीमत के अलग - अलग होने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है।

  • यही वजह है कि मुंबई में पेट्रोल दिल्ली की तुलना में महंगा है क्योंकि दिल्ली में बिक्री कर कम है और इसी वजह से अलग-अलग शहरों में तेल की कीमत भी कम-ज्यादा होती है।

  • विभिन्न राज्यों में ये बिक्री कर या वैट 17 फीसदी से लेकर 37 फीसदी तक है।

  • इसे साफ सुथरा करने के लिए इंडियन आयल, भारत पेट्रोलियम जैसी तेलशोधक कंपनी 4 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से अपना खर्च वसूलती है।

  • जो पेट्रोल पंप इसे बेचेगा उसको हर लीटर पर लगभग सवा दो रूपये का कमीशन दिया जाता है।

  • इसे साफ सुथरा करने के लिए इंडियन आयल, भारत पेट्रोलियम जैसी तेलशोधक कंपनी 4 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से अपना खर्च वसूलती है।




हाल ही में कंपनियों ने लगातार पट्रोल की कीमतों में इजाफा किया है।

भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन एक आरटीआई से ख़ुलासा हुआ है कि भारत दूसरे देशों को बहुत सस्ते में पेट्रोल-डीज़ल बेचता रहा है। मुंबई में सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल 86-87 रुपये के आसपास प्रति लीटर बेच रही है। लेकिन यही तेल मॉरीशस और मलेशिया को इसकी आधी से भी कम क़ीमत पर बेचा जा रहा है। 

आरटीआई कार्यकर्ता रोहित सभरवाल को ये जानकारी पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत आने वाली सरकारी कंपनी मंगलूर रिफ़ाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड से मिली है।

तेल कंपनियों ने एक बार फिर से पेट्रोल की कीमतें बढ़ाकर कोशिश की है कि सरकारी तेल कंपनियों का घाटा पूरा किया जा सके

भारत में पेट्रोल की कीमतों का नियंत्रण सरकार नही करती बल्कि कंपनियां करती हैं, पर डीजल और कैरोसिन और रसोई गैस की कीमतों पर अभी भी सरकार का ही नियंत्रण है और इस पर सरकार सब्सीडी देती है।

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